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"अपमान का विष"
"अपमान का विष समुद्र में मथा हुआ, चासनी मे लिप्त, रस से गूंथा हुआ; बोले सवार हो शीर्ष पर एकल, जितना ऊँचा हो प्रतीत पागल; उतना ही गर्त म...
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जिसने उसे बदनाम किया, हाँ जिसने सरेआम किया, कुछ न बोला वो उस वक्त, चुप रहा वो बनके सख्त; खुश थे जो ऐसा कर के, भूल गये वो अपना वक्त, ...
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गौरवान्वित हूँ कि चालाक नही, खुश हूँ कि बेवकूफ ही सही; बेवकूफ भी हूँ कि बेवकूफ ही नही, खुश हूँ कि बेवकूफ ही सही। कर लेता नादानी एक बा...
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